Navratri kyu manate hai

Navratri aur Dashera kyu manate hai :-

Navratri ka tyohaar hindu ka pavitra tyohaar mana jata hai .Kaha jaata hai ki mahishasur naam ka ek rakshas tha jo pure brahmand me aatank faila kar rakha tha .
Brahma ji ka usko vardan mila tha ki koi use maar nahi sakta tha .Jiske karan samagra devi devta usse bhaybhit the .Sabhi devi devta ke aagrah se tino mahadevo ne milkar ek shakti ki utpatti ki jo maha shakti Naudurga ke roop me jani jati hai .Mata shakti aur Mahishasur ke bich me 10 dino tak bhayankar yudh chala tha dasve din mata shakti ko mahishasur par vijay prapti huyi .Usdin se navratri ka tyohar aur vijayadashami manayi jane Lagi.

       Dusre Katha ke anusaar bhagvan shri Ram ne Ravan ka vadh kiya tha jo asatya pr satya ki vijay prapti kahlati hai Jise aaj dusshera ke roop me manayi jati  hai

navratri me garba ka mahotshaw :-

 navratri garba
            navratri  ka tyohar hindu dharma me aur usme  Gujarat me  bahut hi dhoom dham se manaya jane wala tyohar hai , navratri ke liye kai din pahle se log iski tayari me lag jate hai , Navratri me Mata ka khus karne ke liye Garba ka mahotshaw manaya jata hai , jiske liye log tarah tarah ke naye kapde pahante hai , Mataye aur bahne Chaniya choli pahan kar dandiya khelti hai ,

Garba:-  

        garba yah gujarat ka paramparik  lok ntiya hai jise saubhagya ka pratik mana jata hai ,hindu dharma ki manyata ke anusar nauratri ke  nav din Garba khel kar bhaktjan Mata  durga ko prasann karne ki kosis karte hai aur apne liye manchahe fal ki kamna karte  hai.

MITTI KE GHADE KI STHAPANA:- 

                        nav ratri ke shaam ko dandiya nirtya ke jariye durga mata ki pooja ki jate hai jisme chhed yukt mitti ke ghade jise "GARBO" kahte hai  ,ki sthapana ki jati hai uske bad usme Dipak jalaya jata hai , yah deep Gyan ki rosni ka pratik mana jata,


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अदरक(GINGER ) के फायदे और उसके विभिन्न उपयोग

अदरक खाद्य पदार्थ के साथ साथ औषधि  में भी उपयोग :-


                          सदियों से अदरक का उपयोग अलग अलग प्रकार से होता आ  रहा है।  अक्सर अदरक का उपयोग  हम घर की रसोई में तो करते ही है ,साथ में अदरक औषधि के रूप में भी खूब उपयोगी है।  अदरक को सूखा कर उसको सोंठ के रूप में  अथवा उसका रस निकाल कर उसका उपयोग किया जाता है।  उसके साथ उसके अर्क का  उपयोग अन्य खाद्य पदार्थो में  और कभी  कभी कॉस्मेटिक में भी किया जाता है। 
घर के रसोई में अलग अलग खाद्य सामग्री बनाने में अदरक का उपयोग होता है ,चाय से लेकर सब्जी दाल पुलाव कोई भी खाद्य सामग्री बनाने में अदरक का उपयोग होता है। 

   अदरक का स्वास्थ्य पर  असर :-

                       अदरक की सुगंध और उसका स्वाद उसमे रहे हुये कुदरती तेल में से आती है जिसे जिंजरोल के  नाम से पहचाना जाता है।  इसके साथ अदरक का स्वास्थ्य सम्बंधित बीमारियों  में भी  कई उपयोग है आइये जानते अदरक के अलग अलग लाभ ,
  • अदरक में जिंजरोल है जो एक शक्तिशाली एंटी इंफ्लामेटोरी ,एंटी ऑक्सीडेंट है जो पाचन में बहुत उपयोगी है। 
  • चक्कर या उलटी आती हो तो अदरक का एक छोटा टुकड़ा मुँह में रखकर चूसने से  आराम मिलता है। 
  • अदरक चक्कर या उलटी की  दूर करने के साथ साथ कई बार महिलाओं में मॉर्निंग सिकनेस रहता है  और कई बार ओप्रेसन  बाद उलटी  समस्या होती रहती है उस समय अदरक बहुत सहायक है। 
  • कैंसर  के मरीज को अदरक का सेवन  बहुत लाभकारी  है। 
  • फ्लू  बुखार  दरमियान मुँह बेस्वाद हो जाता है उस समय अदरक का रस चूसने से राहत मिलती है। 
  • अदरक के  सेवन से शरीर के  नसों के दर्द ,सूजन  में  राहत मिलती है। 
  • ऑस्टिओ आर्थराइटिस के मरीज के लिए अदरक बहुत  लाभकारी है। 
  • अदरक के सेवन से ब्लड शुगर कंट्रोल   रहता है और ह्रदय से सम्बंधित रोग होने की सम्भावना कम  हो जाती है। 
  • किसी भी प्रकार की अपच की समस्या को दूर करने में अदरक बहुत सहायक है। अदरक के रस का सेवन करने से किसी  प्रकार की अपच की तकलीफ दूर  जाती है। 
  • सामान्य रूप से महिलाओं में मासिकचक्र  दरमियान पेट में दुखाव होता रहता है उस समय  अदरक का पावडर लेने से आराम मिलता है 
  • अदरक का सेवन करने  मोटापा कम होता है। 
  • अदरक दिमाग को सक्रिय बनाता है  तथा अल्ज़ाइमर जैसे रोगो के सामने रक्षण करता है। 

सेहत के लिए अदरक के अनेक फायदे :

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  1. स्वास सम्बन्धी समस्या :-    
           जिन्हे स्वास सम्बन्धी  समस्या है उनके लिए अदरक बहुत  ही असरकारक  औषधि है , एंटीहिस्टामाईन गुण  होते है जो किसी भी प्रकार  एलर्जी को ठीक करने में मदद करते है ,सर्दी  जुकाम जैसी समस्या के लिए  सदियों से अदरक का इस्तेमाल  किया जा रहा है। नाक बंद  हो जाने पर या छाती में कफ जम जाने पर अदरक की चाय  पीने  से राहत मिलती है।

      2 . पाचन :-  

               अदरक के सेवन से पाचन शक्ति मजबूत होती है ,इसके अलावा गैस के कारण होने वाली  पेट  में ऐंठन  की समस्या और दस्त की समस्या से  रा हत मिलती है। 

      3 .कैंसर :- 
                           कई शोधों में यह बात भी साबित हुई है कि अदरक कैंसर से बचाने में मदद करता है। शोध में पाया गया है कि अदरक के अंदर कैंसर रोधी गुण मौजूद हैं, जो महिलाओं को स्तन कैंसर और गर्भाशय कैंसर से बचाते हैं।  जिन्हें कैंसर की बीमारी होती है, उन्हें कीमोथैरेपी दी जाती है। कीमोथैरेपी के बाद रोगी को जी-मिचलाने की समस्या होती है। 

      4   मासिक धर्म  में राहत :-
                   
                             अदरक के औषधीय गुण मासिक धर्म में भी फायदा पहुंचाते हैं। एक स्टडी में यह बात सामने आई है कि अदरक मासिक धर्म से राहत दिलाने में मदद करता है। इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो एक प्राकृतिक दर्द निवाकर का काम करते हैं। ऐसे में, मासिक धर्म के दौरान होने वाले दर्द से राहत पाने के लिए अदरक का इस्तेमाल किया जा सकता है। 


स्किन समस्या से छुटकारा पाने के आसान टिप्स हिंदी में




स्किन की समस्या :-

आज के इस भाग दौड़ जिंदगी में हम अपने स्किन का ध्यान नहीं रख पाते। बाज़ार में बिकने वाली  केमिकल युक्त  क्रीम पावडर  हमारी त्वचा की निखार को छीन रहे है। ऐसे में कुदरत ने हमें बहुत सारे ऐसे खाद्य सामग्री और जड़ी बूटी दी हुयी है जिनसे हम अपनी त्वचा का निखार वापस ला सकते है।  उसके लिए हमें थोड़ी सी खाने पिने की चीजों में सावधानी बरतनी होगी। तो आइए जानते है कौन  कौन से ऐसे खाद्य  पदार्थ है जिनसे हम आसानी से चेहरे के दाग धब्बो ,कील मुहासे को हटा सकते है। 
सबसे पहले बात
करते है बेसन की। जो आज हर घर  में आसानी से मिल जाती है ,

बेसन:-

    बेसन  बेजान त्वचाडार्क स्किनपिंपल्सदाग धब्बों को दूर करने में उपयोगी होता है। इसका प्रयोग अनचाहे बालों से भी छुटकारा पाने के लिए भी कर सकते हैं। त्वचा के लिए बेसन के फायदे अनोखे होते हैं बस जरूरत है इसे जानने की।
बेसन एक ऐसा घरेलू सामग्री है जिसका प्रयोग रेसिपी बनाने के लिए किया जाता है लेकिन खाने के साथ साथ खूबसूरती बढाने के लिए भी इसका इस्तेमाल  किया जाता है। यह पूरी तरह नैचुरल होता है इसलिए इसका किसी प्रकार का कोई साइड इफैक्ट नहीं होता है।


बेसन का इस्तेमाल कर आप साफचमकती त्वचा पा सकती हैं जिससे सब की निगाहें आप पर टिकी रह जाएंगी। तो आइए आपको बताते है कि बेसन का इस्तेमाल आप अपनी खुबसूरती बढाने के लिए कैसे कर सकती हैं।बेसन को त्वचा पर ऐसे प्रयोग करें-
मुहांसे को करें पल में गायब:-
  बढती उम्र के साथ मुहांसो का असर आपके चेहरे पर दिखने लगता है इसके लिए आप बेसन का इस्तेमाल कर सकती हैं। आपको  बेसन में हल्दी को मिलाकर चेहरे पर लगाना होगा। इस लेप को आप 15 मिनट के लिए छोड़ दें। जल्द ही मुंहासों पर असर दिखने लगेगा।

टैनिंग को खत्म करने में:-

  त्वचा की टैनिंग खत्म करने के लिए आपको  बेसन में  एक चुटकी हल्दी पाउडर,आधे नीबू का रस और  पानी को मिक्स कर लेप बनाएं और इसे अपने त्वचा पर 10 मिनट के लिए लगा कर छोड़ दें। पानी से धुल लें, धीरे-धीरे आपके त्चचा की टैनिंग खत्म हो जाऐगी।
रूखी त्वचा के लिए:-
    रूखी त्वचा से फ्री कराने में भी बेसन लाभकारी है।सर्दियों में रूखी त्वचा यानी ड्राई स्किन की समस्या अकसर हो जाती है।  इस के लिए बेसन में मलाई या दूध, शहद और 1 चुटकी हलदी मिलाएं  और इस लेप को 15 मिनट के लिए चेहरे पर लगाएं। सूखने पर पानी से धो लें इससे आपकी त्वचा में ग्लो आएगा और नमी भी बनी रहेगी।
ऑयली त्वचा में फायदेमंद:- 
    रूखी त्वचा के साथ-साथ बेसन ऑयली स्कीन पर भी कारगर साबित होता है। इसके लिए  बेसन और दही को मिला कर चेहरे पर लगाएं और 10  मिनट के बाद लेप को धो लें। साफ, चमकती त्वचा पर सब की निगाहें टिकी रह जाएंगी।

अनचाहें बालों को हटाने के लिए:-

       महिलाऐं चेहरे के अनचाहे बालों से परेशान रहती हैं जिससे छुटकारा पाने के लिए ब्लीचिंग कराती हैं। इस परेशानी से भी बेसन आपको छुटकारा दिला सकता है। इस के लिए 2 चम्मच बेसन में 2 चम्मच सरसों का तेल मिला कर  चेहरे पर लगाएं और हलके हाथों से मलें। इसे करने के बाद धीरे -धीरे आपकी यह परेशानी गायब हो जाएगी।


शरीर को अंदर से साफ़ कैसे करे ,How to detox our body.



शरीर को अंदर से साफ़ कैसे करे

शरीर को( Detox) अंदर से साफ़ कैसे करे :-

                            हम लोग खाने की चीजों को चाहे कितना भी पानी से धो ले लेकिन अनाज ,सब्जी और फलो में फिरभी जहरीले तत्त्व मौजूद रहते है। दूध से लेकर हर खाने  की चीजों में  मिलावट हो रही है।
इसके अलावा  प्रदूषण और धूम्रपान से हमारा शरीर   और भी ख़राब होता जा रहा है।
            ऐसे में हमारे शरीर के अंदर इतनी मात्रा में जहरीले पदार्थ जमा हो चुके हैं जो आपको कभी भी बीमार बना सकते हैं। इन बीमारियों से बचने का एक सीधा और सरल उपाय है शरीर को डिटॉक्स यानि जहरीले पदार्थों से मुक्त करना।  हालांकि, डॉक्टरी प्रक्रिया में दवाओं का सहारा लिया जाता है, लेकिन कुछ ऐसी चीजें हैं... जिनमें कुदरती ऐसे गुण हैं जो धीरे-धीरे आपके शरीर से सारे जहरीले पदार्थ बाहर कर देते हैं।
 गर्मी का मौसम इस प्रक्रिया के लिए सबसे बेहतर होता है, क्योंकि इस मौसम में शरीर तेजी से डिटॉक्स होता है और आपको इसका ज्यादा फायदा मिलता है।
   
 कई सालो से आयुर्वेदिक पद्धति से शरीर के अंदर की सफाई की जा रही है। शरीर के अंदर के विषैले पदार्थ को निकालने के लिए जरूरी है अच्छा भोजन खाये ,रोज व्यायाम करे। 
शरीर के अंदर विषैले पदार्थ रहने से  थकन ,आलस ,कमजोरी, पेट दर्द , सर दर्द आदि  बीमारिया होने लगती है। इस लिए जरूरी है की आप पौस्टिक आहार ले  जिससे बीमारियों से  राहत हो ,इसके अलावा  योग और व्यायाम से  शरीर  स्वस्थ रख सकते है।

   Detox क्या होता है :-

      डेटॉक्स  का अर्थ होता है खून  की सफाई, लिवर  में मौजूद रक्त को शुद्ध करके विषैले पदार्थ को  बाहर निकलना ,शरीर आंतो ,फेफड़ो ,और त्वचा  माध्यम से  पदार्थ  बाहर निकलता है। 

डेटॉक्स की कमी के लक्षण :-

  • सुस्त होना 
  • पेट फूलना 
  • थकन  लगना 
  • त्वचा सम्बंधित रोग 
  • आँखों  निचे सूजन 
  • एलर्जी 
  •  मासक धर्म में प्रॉब्लम 
  • मानसिक प्रॉब्लम 
  • छाती में दर्द होना   
                      शरीर को डिटॉक्स करते समय काफी सावधानी बरतनी पड़ती है क्योंकि इससे अधिक भूख लगने और खाना पचने की प्रक्रिया धीमी हो सकती है।
 इसलिए आज हम आपको कुछ ऐसे तरीके बताएंगे, जिससे आप प्राकृतिक तरीके से शरीर को डिटॉक्स करके अपच, पेट फूलना और तनाव जैसी समस्याओं को दूर कर सकते हैं।


      एलोवेरा जूस :-


                                                                                                                                             

    एलोवेरा जूस  बॉडी डेटॉक्स के लिए बहुत बढ़िया पदार्थ है , एलोवेरा में   Laxative   और   anti  inflamatory properties   पाई जाती है। इसे पीने  से शरीर में भोजन को पचाने वाले बक्टेरिया की संख्या बढ़ती है  जिससे खाना आसानी से पच जाता है  एलोवेरा में fiber  की  संख्या अधिक मात्रा में होने से यह शरीर में जमा होने  वाले fat  को रोकता है  और साथ में शरीर के Imminuty सिस्टम को मजबूत बनाता  है।     पाचन तंत्र मजबूतऔर हेल्थी  स्किन पाना चाहते  तो  एलोवेरा जूस अपने  भोजन में जरूर शामिल करे।

     गेहू की घास ( Wheat Grass ):-

     गेहू के घास का रस यानि WheatGrass juice 

 पोषक तत्वों का भण्डार है।  इसके अंदर विटामिन C , 
विटामिन V , 90  अलग अलग प्रकार के मिनरल्स  ,बीटा  कैरोटीन  और 18  एमिनोएसिड  पाए जाते है। 
आयरन की मात्रा इसमें पालक से भी
ज्यादा पाई जाती है 70 % क्लोरोफिल
पाया जाता है।  हफ्ते  में 3  बार  इसका सेवन करने से खून तेजी से साफ़ होता है और लिवर की समस्या भी दूर होती है  .लगातार  सेवन  से ब्लड फ्लो  बेहतर बना रहता है  तथा चेहरे के दाग धब्बे  और कालापन दूर होता जाता है।  शरीर का वजन ज्यादा  बढ़ा  हुआ  हो तो  WheatGrass juice   का निम्बू के साथ   सेवन करे। 
 whear grass उगाने क लिए  कोई भी मिटटी के गमले  में कुछ गेहूं  के दाने  को  डाल  दे , कुछ दिनों में गेहू  का घास उगने लगेगा , उस घास को काट ले और अच्छी तरह से पीस  ले ,

  • गेहू  की कुछ पत्तियों को जड़ से काट ले और उसे पानी से अच्छी तरह से  धो ले , अच्छी तरह से कूट कूट कर  इसका रस निकाल ले। 
  • आप जूस निकालने वाली मशीन से भी Wheat  grass  juice   सकते है। 
  • रस निकालने  के बाद इसे रखे नहीं तुरंत पी ले और ध्यान रहे की इसे चाय की तरहसिप सिप कर ही पिए 
  • जूस निकालने के बाद इसमें ऑवला ,नीम ,गिलोय। शहद ,तुलसी  अदरक भी डाल  सकते है। 
  • इसमें आप थोड़ा सा पानी भी मिला सकते है। और ध्यान रहे की इसमें निम्बू   नमक   न मिलाएं 

चुकंदर (Beet Root ):-

 


                  चुकंदर  यानि  Beet  Root  डेटोक्सिफिकेशन  के लिए काफी फायदे मंद माना जाता है। चुकंदर  के  अंदर कल्शियम ,आयरन ,पोटेसियम ,मैग्नीशियम ,विटामिन C ,फॉस्फोरस प्रचुर मात्रा  पाया जाता है। प्रति  दिन  एक या दो गिलाश चुकंदर  का  रस  पिने से  लिवर स्वस्थ रहता है और शरीर ,में  खून की कमी 
 होती है। 


भोजन  के साथ रोज सलाद में चुकंदर   शामिल किया जाये तो यह भोजन को पचाने में काफी मदद करता है। 
और साथ में चर्बी को रोकने में भी  मदद करता है। 




नारियल पानी (Coconut water ):-

      नारियल पानी शरीर में  जमे विषैले पदार्थो को सबसे जल्दी  बाहर  निकालता  है  .ताज़े नारियल के अंदर  मौजूद electrolight  और Antioxident  शरीर के अंदरूनी सिस्टम  को पुरी तरह  करते है तथा शरीर के अंदर जमे टोक्सिन   बाहर निकलते है। 


                                                             
    इन सभी के अलावा शरीर को डेटॉक्स करने  के लिए हमारी लाइफ स्टाइल में  बदलाव लाना होगा ,
रोजाना 30  से 35  मिनट योग ,व्यायम  या वॉक  करने से भी शरीर  के अंदर से टॉक्सिन्स बाहर  निकलते है
रेगुलर वर्क आउट  हमारे स्वास्थ के साथ साथ  हमारी  त्वचा और ब्रेन  को निखारता है। ज्यादा   से ज्यादा  पानी पीने  के आदत डाले। शरीर में पानी के कमी टॉक्सिन्स को बढ़ाता है                                                                 .

                                                                                                                                                                               
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जानिए अस्थमा  के बारे में, अस्थमा क्या होता है  उपाय और लक्षण                                                                        
  https://wellbloom.blogspot.com/2019/09/ashthama-kya-hai-asthma-ke-gharelu.html


बेस्ट हेल्थ टिप्स ,
                                                                                                                                                                https://wellbloom.blogspot.com/2019/09/best-20-tips-for-active-health.html 
                                                                                                                                                                             स्वा स्थ्य  दिन चर्या
https://wellbloom.blogspot.com/2019/08/blog-post.html                                                                                                                                                                                                             

ASHTHAMA kya hai., asthma ke gharelu upchar

अस्थमा क्या है ?

                        
                          
                     श्वास  नली  में बलगम  जमा हो जाने के कारण स्वास  नली सख्त हो जाती है और उसमे सूजन आ जाती है जिससे श्वास लेने में जो तकलीफ होती है। उसे ही अस्थमा कहते है। 
 अस्थमा एक एलर्जेटीक बीमारी है ,जो मौसम बदलने के कारण जो धुल मिटटी उड़ती है उसमे कीटाणु होते है 
वही कीटाणु हमारे स्वास लेते समय  बॉडी  के अंदर चले जाते है और फेफड़ो में चिपक जाते है जिससे श्वासनली में सूजन आ जाती है और स्वास लेने में तकलीफ होती है।                                                   

अस्थमा के लक्षण :-

  • साँस फूलना 
  • छाती में बलगम जमा हो जाना
  • बार बार खांसी का आना 
  • खासते समय बलगम ना  निकलना 
ये सारे  बलगम के लक्षण है। 

अस्थमा से बचाव :-

 अस्थमा से बचने के लिए  सबसे पहले धुल मिटटी  या प्रदूषण वाली जगह से अपने आप  को बचाये ,धुल  बचने के लिए अपने मुँह पर मॉस या रुमाल  बांध कर रखे ,सिगरेट के धुएं से भी बचे।
  •  धुल  से बचे 
  • मुँह पर रुमाल बांध कर रखे 
  • सिगरेट के धुएं से बचे 
  • केमिकल वाले कलर से दूर रहे 
  • बॉडी स्प्रे से दूर रहे 
  • अगरबत्ती ,मच्छर भागने वाले कोइल से भी दूर रहे 
  • कोल्ड ड्रिंक्स  और फ्लेवर युक्त खाने से बचे 

अस्थमा के प्रकार :-

अस्थमा के प्रकार 
  • एलर्जिक अस्थमा ,
  • नॉनएलर्जिक अस्थमा,
  •  मिक्सड अस्थमा,
  •  एक्सरसाइज इनड्यूस अस्थमा
  •  कफ वेरिएंट अस्थमा
  •  ऑक्यूपेशनल अस्थमा 
  • नॉक्टेर्नल यानी नाइटटाइम अस्थमा

एलर्जिक अस्थमा:-

   एलर्जिक अस्थमा के दौरान आपको किसी चीज से एलर्जी है जैसे धूल-मिट्टी के संपर्क में आते ही आपको दमा हो जाता है या फिर मौसम परिवर्तन के साथ ही आप दमा के शिकार हो जाते हैं। कुत्ते बिल्ली से भी कुछ  एलर्जी होती है। 

नॉनएलर्जिक अस्थमा:-

     इस तरह के अस्थमा का कारण किसी एक चीज की मात्रा अधिक  होने पर होता है। जब आप बहुत अधिक तनाव में हो या बहुत तेज-तेज हंस रहे हो, आपको बहुत अधिक सर्दी लग गई हो या बहुत अधिक खांसी-जुकाम हो। 

 मिक्सड अस्थमा:-

         इस प्रकार का अस्थमा किसी भी  कारणों से हो सकता है। कई बार ये अस्थमा एलर्जिक कारणों से  होता  तो कई बार नॉन एलर्जिक कारणों से। इतना ही नहीं इस प्रकार के अस्थमा के होने के कारणों को पता लगाना भी थोड़ा मुश्किल होता है।
 कफ वेरिएंट अस्थमा

 एक्सरसाइज इनड्यूस अस्थमा:-

कई लोगों को एक्सरसाइज या फिर अधिक शारीरिक सक्रियता के कारण अस्थमा हो जाता है तो कई लोग जब अपनी क्षमता से अधिक काम करने लगते हैं तो वे अस्थमा के शिकार हो जाते हैं

 कफ वेरिएंट अस्थमा:-

        जब आपको लगातार कफ की शिकायत होती है या खांसी के दौरान अधिक कफ आता है तो आपको अस्थमा अटैक पड़ जाता है।

 ऑक्यूपेशनल अस्थमा :-

   ये अस्थमा अटैक अचानक काम के दौरान पड़ता है,  अपने कार्यस्थल का वातावरण सूट नहीं करता जिससे आप अस्थमा के शिकार हो जाते हैं।

नॉक्टेर्नल यानी नाइटटाइम अस्थमा:-

ये अस्थमा का ऐसा प्रकार है जो रात के समय ही होता है यानी जब आपको अकसर रात के समय अस्थमा का अटैक पड़ने लगे तो आपको समझ जाना चाहिए कि आप नॉक्टेर्नल अस्थमा के शिकार हैं।

अस्थमा से बचाव :-


  • अस्‍थमा का उपचार तभी संभव है जब आप समय रहते इसे समझ लें। 
  • अस्‍थमा के लक्षणों को जानकर इसके तुरंत निदान के लिए डॉक्‍टर के पाए जाएं।
  •  अस्‍थमा के उपचार के लिए इसकी दवाएं बहुत कारगर हो सकती हैं। 
  • अस्‍थमा से निपटने के लिए आमतौर पर इन्‍हेल्‍ड स्‍टेरॉयड (नाक के माध्‍यम से दी जाने वाली दवा) और अन्‍य एंटी इंफ्लामेटरी दवाएं अस्‍थमा के लिए जरूरी मानी जाती हैं।
  •  इसके अलावा ब्रोंकॉडायलेटर्स वायुमार्ग के चारों तरफ कसी हुई मांसपेशियों को आराम देकर अस्थमा से राहत दिलाते हैं 
  • अस्‍थमा इन्‍हेलर का भी इलाज के तौर पर प्रयोग किया जाता है। इसके माध्‍यम से फेफड़ों में दवाईयां पहुंचाने का काम किया जाता है।
  • धूम्रपान करने वाले व्‍यक्तियों से दूर रहें। घर को डस्‍ट फ्री बनाएं।  
  • योग के माध्‍यम से अस्‍थमा पर कंट्रोल किया जा सकता है। सूर्य नमस्‍कार, प्राणायाम, भुजंगासन जैसे योग अस्‍थमा में फायदेमंद होते हैं।
  • घर से बाहर निकलने पर मास्‍क साथ रखें। यह प्रदूषण से बचने में मदद करेगा। 
  •  सर्दी के मौसम में धुंध में जानें से बचें।
  • हमेशा गर्म या गुनगुने पानी का सेवन करें। 
  •  अस्‍थमा के मरीजों का खानपान भी बेहतर होना चाहिए। अस्‍थमा के रोगियों को प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा वाली चीजों का सेवन कम से कम करना चाहिए। 
  • कोल्‍ड ड्रिंक, ठंडा पानी और ठंडी प्रकृति वाले आहारों का सेवन नहीं करना चाहिए। 
  • अंडे, मछली और मांस जैसी चीजें अस्‍थमा में हानिकारक होती है।  
  •  अस्‍थमा के मरीजो को आहार में हरी पत्‍तेदार सब्जियों का सेवन करना चाहिए। पालक और गाजर का रस अस्‍थमा में काफी फायदेमंद होता है।
  •  विटामिन ए, सी और ई युक्‍त खाद्य पदार्थ अस्‍थमा मरीजों के लिए लाभकारी होते हैं। एंटीऑक्‍सीडेंट युक्‍त फूड के सेवन से रक्‍त में आक्‍सीजन की मात्रा बढ़ती है।
  •  आहार में लहसुन, अदरक, हल्‍दी और काली मिर्च को जरूर शामिल करें, य‍ह अस्‍थमा से लड़ने में मदद करते हैं। 

अस्थमा के घरेलु उपचार :-

अस्थमा से निपटने के लिए हमारे  घर के रसोई में ही उपयोग में ली जाने वाली खाद्य पदार्थ से घरेलु उपचार बनाकर काफी हद तक इलाज कर सकते है। 
  • लहसुन दमा के इलाज में काफी कारगर साबित होता है। 30 मिली दूध में लहसुन की पांच कलियां उबालें और इस मिश्रण का हर रोज सेवन करने से दमे में शुरुआती अवस्था में काफी फायदा मिलता है।
  •  अदरक की गरम चाय में लहसुन की दो पिसी कलियां मिलाकर पीने से भी अस्थमा नियंत्रित रहता है।
  •  सुबह और शाम इस चाय का सेवन करने से मरीज को फायदा होता है।
  •  दमा रोगी पानी में अजवाइन मिलाकर इसे उबालें और पानी से उठती भाप लें, यह घरेलू उपाय काफी फायदेमंद होता है।
  •  4-5 लौंग लें और 125 मिली पानी में 5 मिनट तक उबालें। इस मिश्रण को छानकर इसमें एक चम्मच शुद्ध शहद मिलाएँ और गरम-गरम पी लें। हर रोज दो से तीन बार यह काढ़ा बनाकर पीने से मरीज को निश्चित रूप से लाभ होता है।  
  • 180 मिमी पानी में मुट्ठीभर सहजन की पत्तियां मिलाकर करीब 5 मिनट तक उबालें। मिश्रण को ठंडा होने दें, उसमें चुटकीभर नमक, कालीमिर्च और नीबू रस भी मिलाया जा सकता है। इस सूप का नियमित रूप से इस्तेमाल दमा उपचार में कारगर माना गया है।
  •  अदरक का एक चम्मच ताजा रस, एक कप मेथी के काढ़े और थोड़ा  शहद इस मिश्रण में मिलाएं। दमे के मरीजों के लिए यह मिश्रण लाजवाब साबित होता है। 
  • मेथी का काढ़ा तैयार करने के लिए एक चम्मच मैथीदाना और एक कप पानी उबालें। हर रोज सुबह-शाम इस मिश्रण का सेवन करने से निश्चित लाभ मिलता है। 



siddhi vinayak gujarat




सिद्धि विनायक


सिद्धि विनायक मंदिर :-

     सिद्धि विनायक मंदिर गुजरात के खेड़ा जिले के महेमदाबाद में स्थित है। यह मंदिर बहुत ही आकर्षक है ,इस मंदिर की बनावट  भगवान गणेश की छबि  के रूप में बनाया गया है ,जो लोगो को बहुत आकर्षित करता है।  वैसे तो गुजरात में  बहुत सारे मंदिर है जैसे सोमनाथ ,अम्बाजी ,पावागढ़ ,अक्षरधाम लेकिन अब सिद्धि विनायक मंदिर देश का सबसे विशाल मंदिर गिना जाता है।  अहमदाबाद से करीब 25 किलोमीटर की दूरी पर  वात्रक नदी के किनारे यह मंदिर बनाया गया है ,यह मंदिर बच्चो के पिकनिक के लिए भी बहुत बढ़िया स्थान है। 

मंदिर की स्थापना :-    

               सिद्धि वियनायक मंदिर की स्थापना(भूमि पूजन) 9 March 2011 दिन बुधवार (Wednesday ) को हुआ था। मंदिर के संचालक श्री नरेंद्र भाई  पुरोहित ने मंदिर का निर्माण  करवाया था, मंदिर में मुंबई के 'सिद्धिविनायक मंदिर' से लाई गई ज्योत की स्थापना की गई है और इसीलिए मंदिर का नाम भी ‘सिद्धिविनायक’ रखा गया है। 

         मंदिर का निर्माण स्थल कुल 6 लाख स्कवेयर फ़ीट में बना हुआ है। गणपति के आकार का यह मंदिर जमीन से 20 फीट की  ऊंचाई पर निर्मित है, जिसमें भगवान गणेश की मूर्ति की स्थापना जमीन से 56 फीट की ऊंचाई पर की गई है।

 मंदिर का निर्माण स्थल :-

निर्माण स्थल :-6 लाख स्कवेयर फ़ीट 

लम्बाई        :- 120 फ़ीट 

ऊचाई         :-71 फ़ीट 

चौड़ाई         :-80 फ़ीट 

मंदिर का कुल खर्च :-

   मंदिर को बनवाने में कुल लगभग 14 करोड़ रुपये की लागत का खर्च हुआ था।
  

 मंदिर की व्यवस्थाएं :-

  • मंदिर में जाने के लिए सीढ़ियों के साथ लिफ्ट की व्यवस्था है। 
  • विशाल  पार्क और फुहारे की व्यवस्था
  • विशाल वाहन पार्किंग की व्यवस्था जिसमे 50 बसे,500 कारे और 2000  भी ज्यादा 2 व्हीलर पार्क हो सकेंगे। 
  • मंदिर के बीचो बिच स्वस्तिक आकार के फूलो के बगीचे बनाये गए गए है। 
  • मंदिर के दाहिने तरफ विशाल कैंटीन की व्यवस्था है। 
  • मंदिर के बाये तरफ होटल  की व्यवस्था है जिसमे AC  और NON AC  कमरे है 
  • बच्चो के खेलने  के लिए खेल क्रीड़ा की व्यवस्था 
मंदिर के अन्य फोटो :- 
                    मंदिर के अंदर गणेश जी की मूर्ति के साथ उनके कई   
और भी कई सारे  रूपों के दर्शन देखने को मिलते है अलग अलग देशो में 
गणेश जी को किस नाम से पुकारते है वह सारी तस्वीरें वहां देखने को मिलता है।